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The Father : एक फरिश्ता पिता के रुप में

पिता : 

पिता के अन्य नाम भी है जैसे पापा , अब्बा , डैडी ,आदि। हमारे हिंदी शास्त्रों में या कविताओं में कहानियों में मां के विषय में बहुत कुछ दिखाया गया है  पर पिता के विषय में इतना लिखा ना गया हैं, क्युकी मां का प्यार खुली किताब सा होता है पर पिता का प्यार तो उनकी डाट ,उनके गुस्से में ही होता हैं।

 मां संतान की पहली अध्यापिका होती है जो उसे संस्कार का पाठ सिखाती हैं पर पिता वह है जो जीने की कला सिखाता है। 

पिता के प्रेम को कुछ पक्तियों के माध्यम से दर्शाने का प्रयास : 

जब बंद हो जाए किस्मत के सब दरवाज़े 

फिर भी न हार माने वो पिता होता हैं। 

खुशी का हर लम्हा पास होता हैं

जब पिता साथ होता हैं । 

हजारों मुश्किलें खड़ी हो दीवारों सी 

पर टकराने वाला एक पिता होता हैं।

जिद कैसी भी हो पूरी जरूर होती हैं

जिनके सर पे पिता का हाथ होता हैं ।

 

देकर खुशी औलाद को दुनिया भर की  

अकेले में आसूं  बहा लेने वाला पिता होता हैं

उदासी के अंधेरे कमरे में 

दिया बन जलने वाला पिता होता हैं।

 

तन पर बेशक लिबास कम हो 

पैरों में हजारों काटें क्यू न चुभे हों 

फिर भी हर मुश्किल डगर पर 

हाथ थाम चलने वाला पिता होता हैं।   

 

कठोर दिल बन हालत से लड़ना सिखाता है

पर बच्चे की छोटी सी तकलीफ से बिखर जाता हैं

मुश्किल वक्त में जो ढाल  बन जाता हैं 

दोस्त बन जो खूब हसाता हैं 

टाल दे जो नसीब का लिखा होता हैं

ऐसा तो बस पिता होता हैं।

 

मां को प्रेम की सब मूरत समझते हैं

उससे हो मिलती जुलती उसकी सूरत समझते हैं, 

पर नसीब को बनाने वाला वो रचयिता होता हैं

हां वो एक पिता होता हैं।

 

लायक  होती है वो  औलादें 

जिनको पिता का प्यार मिलता हैं 

क्यूंकि जीवन की धूप में 

छाव सा  स्पर्श पिता होता हैं।

 

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