सदाबहार खिलने वाले इस खूबसूरत से फूल को कई प्रजातियां है। मां दुर्गा को गुड़हल का पुष्प अति प्रिय हैं। गुड़हल को जवाकुसुम के नाम से भी जाना जाता हैं। यह मालवेसी परिवार से संबंध रखते हैं। यह पुष्प अनेक रंगों में पाया जाता हैं।
गुड़हल का वनस्पतिक नाम हिबिस्कस रोजा सैनेंसिस होता हैं। इनका कुल नाम मैलोस होता हैं। जिसके। अंतर्गत २४४ वंश और ४२२५ प्रजातियां होती है।
वैसे तो आमतौर पर गुड़हल हर मौसम में ही फूल देता है पर बारिश के मौसम में गुड़हल के फूल ज्यादा खिलते हैं । इन्हे सर्दियों में अधिक देख भाल की जरूरत होती हैं। समय समय पर इनमे आप खाद डालते रहे ये जल्दी नहीं सूखते हैं।
गुड़हल की सबसे ज्यादा पाई जाने वाली प्रजाति शेरोन का गुलाब है । जो मुख्तः चीन में पाई जाती है । ये गुच्छे में खिलते है और मध्य गर्मी से लेकर अंत गर्मियों तक बहुत खिलते हैं। अन्य भी कई प्रकार की प्रजाति पाई जाती है जो मुख्यत निम्न हैं -
गुड़हल का फूल जहा आपके आंगन की खुबसूरती को बढ़ाता है वही इसके अनेक औषधिक लाभ भी होते हैं।
1 गुड़हल के फूल को पीस कर घाव पे लगाने से घाव जल्दी भर जाता हैं।
2 गुड़हल की पत्ती को पानी में उबालकर बालों में लगाने से बालों सिल्की और मुलायम होते हैं।
3 इसके फूलों को खाने से आपकी सेक्स लाइफ भी अच्छी होती हैं।
4 गुड़हल के फूल को घर में लगाने से ब्लड प्रेशर में भी लाभ मिलता हैं ।
5 गुड़हल के फूल को सुखाकर इसका पाउडर बना ले अब इसका उपयोग खाने में करे आपके शरीर से कई विकार दूर होंगे।
6 जलने व कही कटने की स्थिति में भी इसके पत्ती का लेप लगाया जाए तो यह फ़ायदा करता है।
7 गुड़हल के प्रयोग से कोलेस्ट्रॉल भी घटता हैं।
8 गुड़हल की पत्तियों का रस पीने से वेट भी घटता हैं।
9 गुड़हल के पत्तों में फ्लेवनॉयड और पॉलीफेनॉल होता हुआ जो पेट के दर्द और और अंदरूनी पेट की सूजन को भी कम करता हैं।
10 वास्तु के हिसाब से भी देखा जाए तो यह पौधा सुख शांति के लिए घर में लगाना उपयोगी होता हैं।
गुड़हल सबसे आसानी से लगने वाला पौधा है । बारिश के मौसम में आप इसकी कटिंग लगा दे हर आसानी से जमीन में पकड़ बना लेता हैं। गुड़हल बालू मिट्टी , लाल मिट्टी में भी आसानी से उग जाता हैं।गुड़हल के दोमट मिट्टी सबसे अधिक उपयोगी होती है बस समय समय पर आप खाद डालते रहे ये लंबे समय तक खिलते है।
अमेरिकन गुड़हल
यह मुख्यत लाल और सफ़ेद शेड्स में होते हैं।