Religion - Article

img
Religion

Aarti Song : भगवान और उनसे जुड़ी आरतियां

हमारे हिंदू धर्म में प्रत्येक भगवान का विशेष महत्व बताया गया है साथ ही हर भगवान से जुड़े अलग मंत्र और अगल पूजा विधि , आरती हैं। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख आरतियां जिनसे दिन की शुरुआत आपको आंतरिक मन की शांति और समृद्धि देगी। 

श्री गणेश ( Shri Ganesha) 

किसी भी धार्मिक पर्व और त्यौहार की शुरुआत भगवान गणेश की पूजन से होती हैं। इसलिए आइए जानते है श्री गणेश भगवान जी की आरती जिनके पूजन से रिद्धि सिद्धि की प्राप्ति होती हैं। 

आरती 

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी.
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी.
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा.
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
अँधे को आँख देत, कोढ़िन को काया.
बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया.
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी.
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा. 

गणेश जी का बीज मंत्र 

ॐ गं गणपतये नमः  

भगवान भोलेनाथ ( Bholenath Ji) 

आदिदेव महादेव शिव के पूजन से आप आकाश्मिक मृत्यु से बच सकते हैं। साथ ही भोलेनाथ की कृपा से हर मनोकामना पूर्ति होती हैं और सुहाग की रक्षा होती हैं। 

आरती

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥ 

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥ 

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥ 

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥ 

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥ 

शिव जी का बीज मंत्र

ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय  

 मां दुर्गा (Maa Durga) 

त्यौहार नवरात्रों का हो या जागरण का मां दुर्गा का पूजन अति आवश्यक है। मां दुर्गा के पूजन से स्त्रियों का सुहाग बढ़ता है मां की कृपा से संतान का सुख मिलता हैं।आइए मां दुर्गा की आरती जानें:

मां दुर्गा की आरती 

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥

मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को।

उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै। 

रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती 

कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥जय॥

शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती । 

धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥जय॥

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।

बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥जय॥

भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी।

मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥जय॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।

श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥जय॥

श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै ।

कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥जय॥ 

मां दुर्गा का बीज मंत्र 

ऐं ह्लीं देव्यै नमः  

श्री कृष्णा (Shri Krishna) 

कन्हैया की आरती ,कन्हैया का लालन पालन, पूजा पाठ हमेशा ही जरुरी रहता हैं। आने वाले मास में कन्हैया की कृष्ण जन्माष्टमी हैं। ऐसे महोत्सव में कन्हैया की पूजा और आरती जानते हैं :  

श्री कृष्ण आरती 

आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी 

गले में बैजन्तीमाला बजावैं मुरलि मधुर बाला॥

श्रवण में कुंडल झलकाता नंद के आनंद नन्दलाला की। आरती।

गगन सम अंगकान्ति काली राधिका चमक रही आली।

लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर-सी अलक कस्तूरी तिलक। 

चंद्र-सी झलक ललित छबि श्यामा प्यारी की। आरती ।

कनकमय मोर मुकुट बिलसैं देवता दरसन को तरसैं। 

गगन से सुमन राशि बरसैं बजै मुरचंग मधुर मृदंग।

ग्वालिनी संग-अतुल रति गोपकुमारी की। आरती। 

जहां से प्रगट भई गंगा कलुष कलिहारिणी गंगा।

स्मरण से होत मोहभंगा बसी शिव शीश जटा के बीच।

हरै अघ-कीच चरण छवि श्री बनवारी की। आरती।

चमकती उज्ज्वल तट रेनू बज रही बृंदावन बेनू।

चहुं दिशि गोपी ग्वालधेनु हंसत मृदुमन्द चांदनी चंद।

कटत भवफन्द टेर सुनु दीन भिखारी की। आरती । 

श्री कृष्ण बीज मंत्र 

ॐ क्लीं कृष्ण। 

श्री हनुमान (Shri Hanuman) 

बजरंगबली हनुमान के पूजन का महोत्सव विशेष रूप मंगलवार को हैं। अन्य रूप से व्रत पूजन और जेठ के बड़े मंगल में हनुमान जी महाराज के पूजन आरती का बहुत महत्व हैं। आइए जानते है हनुमान जी की आरती : 

हनुमान जी की आरती 

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे। 

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।

पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े। 

बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे। 

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई। 

जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। 

आरती कीजै… 

हनुमान की बीज मंत्र 

ऊँ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट। 

प्रभु श्री राम ( Prabhu Shri Ram) 

हनुमान के परम पूज्य भगवान श्री राम जी के पूजा का बहुत महत्व होता हैं। राम जानकी , राम दरबार की आरती करने से घर में सुख शांति स्थापित होती हैं। 

श्री राम आरती

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। 

कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।। 

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।। 

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।। 

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। 

श्री राम जी का बीज मंत्र 

ॐ रां रामाय नमः॥ 

मां तुलसी (मां Tulsi)

मां तुलसी का आंगन में होना अति शुभ हैं।तुलसी पूजन से घर में सुख शांति का वास होता हैं। तुलसी मां के होने से घर की नेजेटिविटी दूर होती हैं साथ रोग दोष का अंत होता हैं। 

मां तुलसी आरती 

जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।
मैय्या जय तुलसी माता।। सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर।
रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता।
मैय्या जय तुलसी माता।।

बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता।
मैय्या जय तुलसी माता।।

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित।
पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता।
मैय्या जय तुलसी माता।।

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में।
मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता।
मैय्या जय तुलसी माता।।

हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी।
प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता।
हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता।
मैय्या जय तुलसी माता।।

जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता॥
मैय्या जय तुलसी माता।।  

मां तुलसी बीज मंत्र 

ॐ सुभद्राय नमः  

 

मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) 

लक्ष्मी मां के पूजन से घर में सुख समृद्धि आती हैं , संध्या काल में मां लक्ष्मी के पूजन से घर की बरक्कत आती है। सभी अधूरे काम पूरे होते हैं। 

मां लक्ष्मी की आरती 


ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

दुर्गा रूप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥ 

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
।।ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता...॥ 

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
।।ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥ 

मां लक्ष्मी का बीज मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:

Write Your Comments

Subscribe To Our Newsletter

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor