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What Is Surrogacy : जाने, सेरोगेसी क्या हैं, और इसका क्या प्रोसेस होता है?

मां बनना हर स्त्री के जीवन में सौभाग्य का प्रतीक होता हैं। एक स्त्री मां बनने के बाद ही परिपूर्ण होती हैं। ऐसे में कई बार कुछ स्त्रियां किसी कारण वश या बीमारी के चलते मां बनने के सुख से वंचित रह जाती हैं। परंतु आज मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली हैं और कृत्रिम उपायों से भी गर्भ धारण की व्यवस्था का प्रावधान हैं। 

सेरोगेसी क्या हैं (What Is Surrogacy)

सेरोगेसी एक ऐसी प्रक्रिया है जहा पत्नी के अलावा किसी अन्य महिला के कोख में बच्चे को पाला जाता हैं। किन्ही कारणों वश आपकी पत्नी मां बनने में अक्षम होती हैं ऐसे में सेरोगेसी की मदद ली जाती हैं। 

इस प्रक्रिया में पुरुष के स्पर्म्स को दूसरी अन्य महिला के अंदर प्रत्यारोपित कर देते हैं। जिसकी कोख को धन देकर खरीदा जाता हैं। ऐसे में जो कपल पैरेंट्स स्वयं नहीं बनना चाहते हैं वह इस विधि द्वारा संतान सुख को पा सकते हैं। हाल ही में प्रीति जिंटा, प्रियंका चोपड़ा ने भी सेरोगेसी के द्वारा मां बनने का सुख पाया हैं।

सेरोगेसी के प्रमुख प्रकार ( Types Of Surrogacy)

सेरोगेसी के प्रमुख प्रकार निम्न हैं:

  • ट्रेडिनेशनल सेरोगेसी 
  • जेस्टेशनल सेरोगेसी  
  • अल्ट्रूइस्टिक सेरोगेसी  
  • कमर्शियल सेरोगेसी 

ट्रेडिनेशनल सेरोगेसी ( Traditional Surrogacy)

ट्रेडिनेशनल सेरोगेसी में पिता के शुक्राणु को सेरोगेट मदर के अंडाणु से मिलाया जाता हैं, इस प्रक्रिया में पैदा हुई संतान की मां जैविक मदर ही होती हैं।

जैविक मां ही 9 महीने संतान को अपनी कोख में रखती है। इस प्रक्रिया में पिता के स्पर्म न होने पर भी आप किसी अन्य व्यक्ति के स्पर्म का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 

 

जेस्टेशनल सेरोगेसी (Gestational Surrogacy)

इस प्रकार की सेरोगेसी में सेरोगेट मदर का बच्चे से सीधे तौर पर रिश्ता नहीं होता हैं। इस तरह की प्रेग्नेसी में कपल के ही एग और स्पर्म का इस्तेमाल किया जाता हैं और बाद में इन्हे सेरोगेट महिला के कोख में प्रत्यारोपित कर दिया जाता हैं। ऐसे में सरोगेट मदर बच्चे की मां नहीं होती बस वह इस बच्चे को जन्म देती हैं। 

 

अल्ट्रूइस्टिक सेरोगेसी (Altruistic Surrogacy)

इस प्रकार की सेरोगेसी में संतान के चाहत में कपल किसी किराए की कोख के घर ले आते हैं, इस सरोगेसी में सरोगेट मदर परिचित होती हैं।वह साथ रहती है और संतान को जन्म देती हैं।

कमर्शियल सेरोगैसी (Comercial Surrogacy)

इस प्रकार की सेरोगेसी में सेरोगेट मदर को अच्छी रकम अदा करनी पड़ती है। ऐसी महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के धन के लिए मां बनती हैं।

सेरोगेसी के समय रखे किन बातों का ध्यान ( Precautions)

  1. सेरोगेट मदर का ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल का ध्यान रखें।
  2. सेरोगेट मदर को कोई वंशानुगत बीमारी ना हों।
  3. सेरोगेट मदर की उम्र 20 से 35 वर्ष की उम्र हों। 
  4. सेरोगेट मदर को थायराइड की समस्या नहीं होनी चाहिए।
  5. कही कही यह भी जानना जरूरी है की सेरोगेट मदर पहले से किसी    संतान को जन्म दे चुकी हो।
  6. सेरोगेट मदर मानसिक रूप से भी हष्ट पुष्ट होनी चाहिए। 

सेरोगेसी बिल (Surrogacy Bill)

सेरोगेसी बिल 2019 में पारित हुआ हैं। इससे कमर्शियल रूप से धन के व्यापार को रोका जाए। बहुत से केस में इसके जरिए मोती रकम लूटने का भी खिस्सा पाया गया हैं। कही जगहों पर तो बच्चों को खरीदने का भी केस सामने आया हैं।

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