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क्या आप जानते है, कैकेयी कैसे बनी श्री कृष्णा की मैया ? पढ़िए कहानी.

भगवान कृष्ण परम दयालु और परम कृपालु है। भगवान कृष्ण अपने भक्तों को हर इच्छा पूरी करने के लिए कई रूपों में जन्म लिए है। रस लीलाएं की , विवाह किए ,अर्जुन के सारथी बने , तो कभी मां कुंती के के दुख हरे, प्रेम में वह राधा रानी के साथ जन्मों जन्म के लिए अमर है, तो सखा भाव में भगवान ने सुदामा के कच्चे चावल खाए। द्रोपदी की लाज बचाई , तो कभी ग्वाल बाल के लिए उनके प्रिय कन्हैया बन उनके दुख हर लिए। 

कृष्ण का माता के प्रति प्रेम 

भगवान कृष्ण का अपनी दोनों ही मां से अति स्नेह और प्रेम था। वह अपनी मां की इच्छा को पूरी करने के लिए अगला जन्म लिए और मां की गोंद में खेल कूद उन्हें मातृत्व का सुख प्रदान किया। 

पौराणिक कथाओं के अनुसार आइए जानते है कैसे पूरी की कन्हैया ने अपनी मां की हर मनोकामना।

माता कैकेयी को दिया वरदान 

त्रेतायुग युग में भगवान राम ने राजा दशरथ के यह जन्म लिया था। राजा दशरथ की तीन रानियाँ थी। प्रभु श्री राम ने जन्म भले ही माता कौशल्या के कोख से जन्म लिया हो पर उनका स्नेह अधिक माता कैकेयी से ही था। जब प्रभु श्री राम ने अपने लिए १४ वर्ष का वनवास मांगा तब माता कैकेयी ने अपने पुत्र की यह इच्छा पूरी की बदले में उन्हें लोगो से ताने सुनने पड़े उनकी छवि बिगड़ गई पर पुत्र प्रेम में वह राम की बात टाल ना सकी। 

प्रभु श्री राम ने मां के इस कष्ट को समझा और उन्हें वरदान दिया मां अगले जन्म में मैं आपकी कोख से जन्म लगा और आप पुनः मेरी मां बनेगी। भगवान कृष्ण ने अपने दिए हुए वरदान के अनुसार द्वापरयुग में कृष्ण जन्म माता देवकी के कोख से लिया। माता कैकेयी ही माता देवकी मां के रूप में थी। 

कौशल्या कैसे बनी कृष्ण लल्ला की मां 

प्रभु श्री राम द्वारा जब कैकेयी मां को अगले जन्म में अपनी मां बनने का वरदान मिला तो माता कौशल्या रूठ गई , कहने लगी मैं तो तेरी मां हू क्या मुझे प्रेम नही करता हैं , तब श्री राम ने कहा मां मैं आपसे भी बहुत प्रेम करता हू पर मैं माता कैकेयी को वरदान दे चुका हु इसलिए मैं आपकी कोख से जन्म नहीं ले सकता हु पर मैं आपको वरदान देता हु की मां मैं आपकी गोंद में ही खेलूंगा। आप ही मेरा लालन पालन करेगी इस प्रकार मां कौशल्या बनी माता यशोदा। 

मां यशोदा की इच्छा  

माता यशोदा और नंदबाबा अपने बाल गोपाल से आखरी बार सूर्य ग्रहण के दिन मिले। माता यशोदा ने अपने पुत्र से कहा की लल्ला मैं तेरे किसी भी विवाह में शामिल न हो सकी मुझे बहुत इच्छा है अपने पुत्र का विवाह देखने की यह बोल माता यशोदा घर की ओर लौट चली। कुछ समय उपरांत माता यशोदा का निधन हुआ प्रभु हरी की कृपा से माता ने अगला जन्म लिया और उन्हें अपने पुत्र के विवाह में शामिल होने का अवसर मिला। 

मां यशोदा ने वकुलादेवी बन लिया जन्म 

माता यशोदा ने वकुलादेवी बन जन्म लिया और वेंकटेशवर जो की भगवान कृष्ण ही थे पद्मावती के संग विवाह किया और माता यशोदा की यह इच्छा पूर्ण करी। माता वकुलादेवी ने ही विष्णु भगवान का नाम श्री निवास भी रखा।

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