अदभुत और अलौकिक सौंदर्य के धनी है भगवान कृष्ण। नारायण के अवतारों में से कृष्ण अवतार को परिपूर्ण और बेहद खास माना गया हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक कान्हा ने अपने अमित छवि प्रस्तुत की को आज भी लोगों के हृदय में बसी हुई हैं।
कथाओं और ऋषि मुनियों के अनुसार भगवान कृष्ण के 13 दिव्य रूप माने गए है। भगवान कृष्ण अपने आप में परिपूर्ण अवतार है। 16 कलाओं , 64 विद्याओं के महाज्ञानी प्रभु कृष्ण ने 13 अनूठे रूप है, आइए इन्हे जानते हैं।
भगवान कृष्ण का बाल रूप सभी रूपों में सबसे मोहक और प्रिय है। लडडू गोपाल का यह रूप घर घर में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है की कृष्ण की पूजा के लिए उनका बाल रूप से सबसे सरल और अदभुत हैं।
इस रूप में कान्हा बन कन्हैया ने अनेक लीलाएं की। पूतना , तड़का, स्कातासुर , बकासुर जैसे अनेक राक्षसों का वध बाल रूप में ही किया। कभी शेषनाग के फन पर क्रीडा की तो मां यशोदा को मुख मंडल में ब्रह्मांड के दर्शन कराएं।
इस रूप में माखन चोर बन कभी चुरा के माखन खाए ,तो कभी ग्वाल बालों को योग विद्या से प्रकट कर दिया। सब महादेव भी इनके अदभुत रूप को देख इनसे मिलने के लिए खुद को रोक न पाए।
कृष्ण ने स्वयं का बेहद सरल रूप प्रस्तुत किया , ग्वाल बालों संग गाय चराते , यमुना तट पर क्रीडा करते, और बासुंरी की धुन पर सभी पंछियों को हरसातें। ग्वालों के साथ रहने के कारण ही इनके इस रूप को गोपाल कहते हैं।
रक्षक रूप में भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठा अपने सभी गोकुल वाशियो की रक्षा की। चारुण्ड और मुसटिक जैसे मल्लाहों से गावों वालो की रक्षा की। कंस द्वारा भेजे जाने वाले अनेक राक्षसों को भगवान कृष्ण ने मार गिराया। इंद्र देव के प्रकोप से भी समस्त गांव की रक्षा करी।
शिष्य कृष्ण के रूप में भगवान कृष्ण ने अपने गुरु संदीपनी मुनि से ज्ञान और शिक्षा प्राप्त की। कृष्ण ने सदैव ही विपतियों से ऋषि मुनि की कुटिया और उनके यज्ञ की रक्षा करी। ऐसा सुना जाता है की भगवान कृष्ण ने जैन धर्म के 22 गुरु श्री नेमीनाथ से भी ज्ञान प्राप्त किया।
संदीपनी मुनि ने गुरु दीक्षा में अपने मरे हुए पुत्र को यमराज से वापस मागा , ऐसे में भगवान कृष्ण ने उनके पुत्र के प्राण लौटकर गुरु दीक्षा दी।
सखा रूप में कृष्ण और सुदामा की दोस्ती युगों युगों तक याद रखीं जायेगी। एक मुठ्ठी कच्चे चावल के बदले में श्री कृष्ण ने अपने मित्र को महल , दौलत, यश, धन सभी कुछ दे दिया। भगवान होने के बावजूद कन्हैया ने अपने हाथों से सुदामा के चरण पग धोए।
श्री कृष्ण के खास सखाओं में सुदामा , श्रीदामा, रसाल, मकरंद , बकुल , शारदा, सदानंद आदि हैं । कृष्ण का प्रेम अपने मित्रो के लिए एक दम निश्चल था। भगवान होते हुए भी एक बेहद खास या प्रेम मयी स्नेह से भरा रिश्ता था।
कृष्ण के प्रेमी रूप को शब्दों में पिरोया नही जा सकता है। अनुपम प्रेम और विश्वास से भरा है कृष्ण का यह प्रेम रूप। त्याग , करुणा , समर्पण , भावना , वेदना , चाह से भरा है कृष्ण का यह रूप। राधा रानी के प्रति उनके प्रेम की विविचना करना असंभव है। विवाह न होने के बाद भी कृष्ण राधा का निस्वार्थ प्रेम अमर हैं।
कर्म योगी कृष्ण ने समस्त संसार के समुक्ख गीता का सार प्रस्तुत किया। की व्यक्ति को कर्म करते रहना चाहिए उसे फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को सदैव उसके पाप पुण्य के आधार पर ही फल मिलता हैं।
कृष्ण के अनुसार व्यक्ति को न ही अतीत में जीना चाहिए न ही भविष्य की चिंता करके खुद को तकलीफ देनी चाहिए। व्यक्ति को हमेशा अच्छा कर्म करते हुए आज में जीना चाहिए।
धर्म की रक्षा हेतु भगवान कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित किया। कौरवों द्वारा अनुचित किए जाने पर सही और गलत का पाठ पढ़ाया जो द्रोपदी के साथ हुआ धर्म विरोधी है।
भगवान कृष्ण ने गीता में लिखा है
यदा यदा हि धर्मस्य ….. अर्थात इस श्लोक के माध्यम से बताया है की जब जब धर्म की हानि होती है मैं जन्म लेता हु और अधर्म का नाश करता हूं।
भगवान कृष्ण महा पराक्रमी योद्धा थे। कृष्ण ने अपने जीवन काल में 10 से अधिक युद्ध लड़े। चारून, जरासंध ,पूतना , बकासुर, कंस , नरकासुर आदि भयंकर राक्षसो का वध किया। महाभारत कौरव और पांडव के मध्य हुआ था पर पुनतः संचालन भगवान कृष्ण ने द्वारा ही हो रहा था।
कृष्ण का यह रूप बेहद प्रभावशाली है। योग विद्या के बल पर कभी अपने आकार को बड़ा कर लेते तो कभी छोटा, कभी अपने शरीर का भार बड़ा लेते तो कभी अपने कानी उंगली के नोंक पर पर्वत श्रृंखला उठा लेते।
योग विद्या के द्वारा ही कृष्ण ने रस लीला रची। एक ही बार में 16हजार रानियों से विवाह किया। कृष्ण की यह अदभुत महिमा वही जानें।
कृष्ण भगवान नारायण के स्वयं ही एक महा तेजस्वी अवतार हैं। इनका यह अवतार पूर्ण अवतार माना जाता है। महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन का मन विचलित हो रहा था , तब भगवान कृष्ण ने उन्हें अपने विराट रूप का दर्शन कराया।
कृष्ण जितने कौशल और साहसी बाहर से थे। उतने ही ज्ञानी, बुद्धिमान , चतुर, विवेकशील अंदर से भी थे। साम दाम दण्ड भेद सभी का ज्ञान कृष्ण को भली भांति था। अपने इसी गुण के कारण कृष्ण ने खाटू श्याम जी से उनका शीश माग लिया। कर्ण से वचन माग लिया। और पांडव को चालाकी से युद्ध कला में निपूर्ण बना दिया।
भगवान कृष्ण को रिश्तों को निभाने को कला भली भांति आती थीं। देवकी मां की कोख से जन्म लेकर जहा उनके दुख रहे वही मां यशोदा को मातृत्व का सुख दिया।
गोपियों के संग रास लीला कर उनके अपने योगी रूप का दर्शन कराया तो ग्वाल बालों संग गाय चराई। कभी सुदामा के दुख रहे, तो कभी अर्जुन को ज्ञान दिया। हर रिश्ते में भगवान ने अपने और अपने भक्तो की इच्छा पूर्ण की।
कृष्ण के कई विवाह हुए जिनमे से 8 मुख्य विवाह हैं। रुक्मणि , जाम्वंती, सत्यभामा, लक्ष्मणा, सत्या, कालिंदी, मित्र्वदा और भद्रा। कृष्ण के 80 से अधिक पुत्र पौत्र थे।
इस प्रकार से जन्म से लेकर मृत्यु के शैय्या तक कृष्ण ने अपने अदभुत रूपों की झलकियां प्रस्तुत की है। कृष्ण का बाल रूप सबसे मनमोहक हैं।
भगवान कृष्ण के 13 दिव्य रूप माने गए है। भगवान कृष्ण अपने आप में परिपूर्ण अवतार है। 16 कलाओं , 64 विद्याओं के महाज्ञानी प्रभु कृष्ण ने 13 अनूठे रूप है, आइए इन्हे जानते हैं।