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Unemployment Poetry : बेरोजगारी पर कुछ पंक्तियां

बेरोजगार युवा

 

आबादी का जोर था 

हर ओर एक ही शोर था ।

कब हो पाएगी कमाई 

आयेगी घर मेरे भी खुशियों की मिठाई ।। 

 

शिक्षित होकर भी आज का युवा भटक रहा 

हालत ऐसी की आसमां से गिरा खजूर पर अटक रहा ।

न ही खेल कूद में हो पाया मैं आगे 

हर दिन केवल जॉब के पीछे ही भागे।।

 

न ही रुचि का कुछ कर पाया 

न ही कोई मुकाम हुआ हासिल।

बेरोजगार युवा अब न रहा 

किसी नौकरी के काबिल।।

 

घर पर भी वही पुराने ताने है 

तेरी पढ़ाई , तेरे नंबर किसी काम न आने है।

जीवन की रेस में मैं पीछे रह गया 

खाली हाथ था, खाली हाथ ही रह गया।। 

सरकार भी अपने हर वादे से  मुकर गई 

निराशा की गहरी काली रात मानो ठहर गई ।

मेरी हस्ती दुनिया 

बिन नौकरी  के बिखर गई ।। 

 

न मैं अमीर पिता का बेटा हूं

न किसी व्यापारी का उत्तराधिकारी ।

एक आम आदमी की संतान हूं मैं 

जिसको बेरोजगारी ले हारी।।

 

 

 

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