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Teej Festival 2022 : हरितालिका तीज पर जाने सुहागन के 16 श्रृंगार

हम भारत देश के वासी है, जहा तीज, त्यौहार, व्रत,पूजन, का विशेष महत्व होता हैं। 33 करोड़ देवी देवताओं की मान्यता वाले इस देश में सभी का विशेष पूजन है और उनके महत्व हैं।


आज हम ऐसे ही एक विशेष व्रत के बारे में जानेंगे जिसे हरितालिका तीज व्रत कहा जाता हैं। इस व्रत में विशेष रूप में मां पार्वती और भोलेनाथ शिव के पूजन का महत्व बताया गया है। हरितालिका तीज व्रत सुहागन स्त्रियों के बहुत महत्त्वपूर्ण व्रत हैं। व्रत के दिन सुहागन स्त्रियां सुबह उठ कर स्नान ध्यान करके तैयार हो जाती और पूरे दिन निर्जल, निराहार रहकर व्रत करती हैं। हरितालिका व्रत का अधिक प्रचलन पूर्वांचल में हैं। तो आइए समझते है हरितालिका तीज व्रत की पूजन विधि , कथाएं और स्त्रीयों के 16 श्रृंगार।


हरितालिका तीज व्रत:
 

सुहागन स्त्रियां को यह बहुत ही धार्मिक व्रत हैं। इस व्रत के दिन स्त्रियां 16 श्रृंगार करती हैं। मां पार्वती और भोलेनाथ का पूजन करती हैं। कथा सुनती हैं। और पति का आशीर्वाद लेकर व्रत विधि पूर्वक पूर्ण करती हैं।
 

हरितालिका तीज व्रत कथा:
 

हरितालिका तीज व्रत कथा मां पार्वती की कथा है। मां पार्वती का महादेव के प्रति निश्छल प्रेम की कहानी है। मां पार्वती में भोलेनाथ को ही जन्म जन्मांतर के लिए अपना पति मान लिया था। 

ऐसे में पिता द्वारा किसी और से विवाह तय किए जाने पर मां पार्वती दुःखी हो गई। ऐसे में मां पार्वती को उनकी सहेलियां लेकर वन में चली गई। वहा मां पार्वती ने जंगल में कठोर तपस्या और व्रत किया निराहार, निर्जल रहकर। 

मां पार्वती से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हे अपनी अर्धांगनी के रूप में स्वीकार किया। तब से यह व्रत हरितालिका तीज के नाम से जाना जाता है | 

हरितालिका तीज व्रत का महत्व:

हरितालिका तीज व्रत का महत्व अधिक यह है की इस व्रत को स्वयं मां पार्वती ने किया था। इस व्रत को करने से सुहागन स्त्रियों का सुहाग बढ़ता हैं।

आज कल के समय में तीज व्रत का प्रचलन कुंवारी कन्याओं में भी बहुत बढ़ा हैं। हरितालिका तीज व्रत को करने से कुंवारी कन्याओं को मन चाहे वर की प्राप्ति होती हैं। 

शास्त्रों के ज्ञाता यह भी मानते है की यदि किसी कारण वश कोई स्त्री विधवा हो जाए तो इस व्रत को करने अगले जन्म में वो अपने सुहाग को अमर कर सकती हैं। 

हरितालिका तीज व्रत के नियम 

  • किसी भी व्रत को फलने के लिए यह बेहद आवश्यक हैं की आप व्रत को कितनी निष्ठा और भावना के साथ रखते हैं।
  • व्रत को सात्विक विचार के साथ रहे । मन बोली वचन से शुद्ध रहे।
  • व्रत काल में सोए नही अपितु ईश्वर के नाम का स्मरण करें ।
  • व्रत में भोजन जल कदापि ग्रहण नहीं करे।
  • तीज व्रत में जल पीने का भी दोष माना गया है इसलिए जल न पिए।
  • सायंकाल भगवान की पूजा करें भोग लगाए और सुहाग की वस्तुएं चढ़ाएं। 
  • अगले दिन सुबह भोर में उठकर नहाए और दान को छुए इसके बाद ही जल ग्रहण करे।

हरितालिका तीज पर जाने 16 श्रृंगार: 

हिंदू धर्म के अनुसार यदि स्त्री विवाहिता है तो उसे पूर्ण श्रृंगार करके ही रहना चाहिए। विवाह के उपरांत हुए व्रत इत्यादि में उसे साज श्रृंगार के साथ ही शामिल होना चाहिए। ऐसा करने से सुहागन स्त्रियों का सुहाग बढ़ता हैं। तो आइए जानते हैं कौन से है वो 16 श्रृंगार : 

  • स्नान
  • बिंदी 
  • सिंदूर
  • काजल 
  • मेंहदी
  • बिछिया
  • चूड़ी
  • मंगलसूत्र
  • नथनी या नथ
  • गजरा
  • मांग टीका
  • झुमका 
  • बाजूबंद
  • कमरबंद
  • पायल  
  • अंगूठी  

स्नान 

स्नान को श्रृंगार का पहला चरण माना गया है की सबसे पहले आप अपने शरीर की शुद्धि करें। इस स्नान में हल्दी का उबटन लगाने का भी रिवाज़ शामिल हैं। 

बिंदी 

सुहागन स्त्रियों को कुमकुम की बिंदी अवश्य अपने माथे पर लगानी चाहिए इससे आपके चेहरे की शोभा बढ़ जाती हैं। 

सिंदूर

हिंदू धर्म में सिंदूर का विशेष महत्व है। इसे सुहागन स्त्री के लिए सर्वोपरी माना गया है। पति की लंबी उम्र को कामना करते हुए स्त्रियां अपने मांग में सिंदूर भरती हैं। 

काजल

काजल बुरी नजर से बचाने के साथ ही आपके आखों की खुबसूरती को भी बढ़ाती हैं। 

मेंहदी

मेंहदी को बेहद शुभ और मांगलिक माना गया है। व्रत , तीज , त्यौहार आदि विशेष अवसरों पर सुहागन स्त्रियां अपने हाथों में मेंहदी रचाती हैं। 

बिछिया

हर धर्म में सुहाग की निशानी होती हैं। ऐसे में हिंदू धर्म में बिछिया को सुहाग की निशानी माना गया है। इसे केवल विवाहित महिला ही धारण करती हैं। विवाह रस्म के दौरान ही इसे वर पक्ष द्वारा पहनाया जाता हैं। 

चूड़ियां

हिंदू धर्म में सुहागन को सुनी कलाई रखने की मनाही है। कांच लाल और हरी चूड़ियां को सुख सम्पन्नता  का प्रतीक माना गया हैं। 

मंगलसूत्र

मंगलसूत्र धारण करने से विशेष प्रयोजन है उन काली मोतियों से है जो आपको और आपके सुहाग को बुरी नजर से बचाती हैं। इसलिए इसे गले में सदैव धारण करें। 

नथ

नथ को ही नथनी भी कहा जाता हैं। नाक चेदन एक संस्कार भी है जिसके अनुसार विवाह से पूर्व स्त्री की नाक अवश्य चेंदी होनी चाहिए। 

गजरा

गजरा आपके बालों की खुबसूरती बढ़ाने के साथ ही साथ खुशबू से आपको खास भी बनाता हैं। बेला , मोगरा , गुलाब आदि के गजरे बहुत प्रचलित हैं।  

मांग टीका 

मांग टीका लगाने का रिवाज़ बहुत पुराना हैं। माथे के बीच में लगाए जाने वाले मांग टिके से स्त्री का सौंदर्य और भी निखर जाता हैं। 

झुमका 

झुमका स्त्रियां अपने कानों में पहनती है जिससे उनके चेहरे की शोभा बढ़ जाती हैं। 

बाजूबंद

बाजूबंद को हाथों में पहना जाता हैं। कांधे के नीचे हिस्से में यह बाहों की सुंदरता को बढाता हैं। 

कमर बंद

 कमरबंद को करधनी भी कहा जाता हैं। यह बेल्ट के समान ही आभूषण होता है जिसे स्त्रियां अपने कमर पर पहनती हैं यह भी बेहद खूबसूरत और प्राचीन आभूषण हैं।  

पायल

हिंदू धर्म के अनुसार कमर से नीचे सोने को धारण करने की मनाही है सोना अति शुद्ध और पवित्र माना जाता है। इसलिए पैरो में चांदी की पायल बिछिया धारण करने का रिवाज़ है। जो स्त्री पायल पहनती है उसमे हार्मोन्स संतुलित रहते हैं साथ ही पायल के स्वर से घर में खुशियां आती हैं। 

अंगूठी

अंगूठियों को स्तरीय उंगली में पहनती है। आज के समय में लड़का लड़की एक दूसरे को अंगूठी पहनाते है जिसे सगाई की रस्म भी कहा जाता हैं। 

अन्य श्रृंगार

समय के साथ साथ फैशन जगत में स्त्रीयों को सजाने संवारने हेतु और भी विकल्प आ रहे है जिससे वह अपना सौंदर्य बढ़ा सके। इसी क्रम में नेल पॉलिश, लिपस्टिक , टैटू, महावार , रोली आदि भी श्रृंगार के प्रतीक हैं।

सुहागन स्त्रियों को तीज व्रत पूजन आदि में हरा या लाल रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए क्युकी इन दोनों को रंगो को सुहागन स्त्रियों के लिए शुभ माना गया हैं। 

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