विघ्न हर्ता भगवान गणेश जी सुंदर और स्थूल शरीर वाले देवता हैं। छोटी आखें , लम्बा बड़ा उदर, लंबी हाथ सूड़ वाले भगवान का स्वरूप बेहद निराला हैं। आइए इस गणेश उत्सव पर जाने भगवान गजानन के अंगों के बारे में।
भगवान गणेश का चौड़ा माथा उनकी बुद्धिमत्ता और कुशलता का प्रतीक है। ऐसे व्यक्तियों की स्मरण शक्ति बहुत तेज होती हैं। विशाल मस्तक हर तरह को चिंताओं , समस्याओं का बोझ स्वयं पर उठाने में सक्षम होता हैं।
भगवान गणेश का मुख बहुत विशाल हैं परंतु बड़े मुख पर छोटी छोटी आखें हैं। इसका अभिप्राय यह है को भगवान गणेश जी सूक्ष्म से सूक्ष्म चीजों को देख लेते थे। इसी प्रकार व्यक्ति को भी किसी भी चीज का अध्यन्न बेहद गहराई से करना चाहिए।
भगवान गणेश के कान बहुत बड़े हैं जो की हाथी का मुख लगने की वजह से है। जिसका अर्थ है सर्वोत्तम श्रवण शक्ति। इसी प्रकार व्यक्ति को भी अपने जीवन में हर बात को बेहद ध्यान से सुनना चाहिए और उपयोगी हो तो जीवन में जरूर उतरना चाहिए।
भगवान गणेश को एक दंत भी कहा जाता हैं। क्युकी भगवान गणेश का एक दंत टूटा हुआ हैं। जो श्रद्धा और दूसरा नास्तिकता का प्रतीक हैं। अर्थात वयक्ति को जीवन में अखंड श्रद्धा रखनी चाहिए भगवान पर और खंडित दांत यह बतलाता हैं व्यक्ति जिनमे नास्तिकता हो उनसे दूर रहे।
साधारण शब्दों में समझे तो अखंडित दांत के अनुसार अच्छाई को अपनाए और खंडित दांत के अनुसार बुराई का त्याग करे।
भगवान गणेश का मुख हाथी का मुख है ऐसे में भगवान गणेश की सूड कार्य कुशलता का प्रतीक हैं। हलती डुलती गणेश भगवान की सूड आपको निरंतर कार्य करने के लिए प्रेरित करती हैं। व्यक्ति को भी जीवन में कार्य कुशल होना चाहिए।
भगवान गणेश चतुर्भुज है। अर्थात उनकी चार भुजाएं हैं। इनकी प्रत्येक भुजा में कुछ जरूर है। भगवान गणेश के एक हाथ में रस्सी हैं। जो कड़क अनुशासन का प्रतीक हैं। अर्थात वयक्ति को जीवन के अनुशासन बंध होना चाहिए।
भगवान गणेश का मुख उनके शरीर के अनुपात के बेहद छोटा हैं। भगवान गणेश का यह मुख संयम का प्रतीक हैं। अर्थात व्यक्ति को जीवन में कम से कम बोलना चाहिए और अधिक अधिक सुनना चाहिए।
भगवान गणेश के एक हाथ में रस्सी तो दूसरे हाथ में कुल्हाड़ी है। जो बंधनों से मुक्ति का प्रतीक हैं। वयक्ति को भी जीवन में मोह माया के बंधन से मुक्त होकर रहना चाहिए क्युकी यह बंधन ही पैरों की बेड़ियां होती हैं।
भगवान गणेश के तीसरे हाथ में लड्डू है। यह लड्डू खुशहाली का प्रतीक हैं। अर्थात व्यक्ति को जीवन में सदैव प्रसन्न होकर रहना चाहिए तभी वो औरों को भी खुश रख सकता हैं।
भगवान गणेश का चौथा हाथ आशीर्वाद देते हुए हैं। यह कृपा का प्रतीक हैं। अर्थात व्यक्ति को भी अपने जीवन में लोगों की मदद करते हुए दान पुण्य करना चाहिए।
भगवान गणेश ने अपनी सवारी के रूप में मूषक अर्थात चूहे को चुना हैं। यह विकारों पर लगाम का प्रतीक हैं। अर्थात व्यक्ति को अपनी बुरी लतों पर कंट्रोल करते हुए उसकी लगाम खीच कर रखनी चाहिए।
यह एकाग्रता और कुशलता का प्रतीक।