भाद्रपद महीने की पूर्णिमा से लेकर अश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक के 16 दिन को पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता हैं। इसका एक मात्र उद्देश्य अपने पितरों को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाना होता हैं , इसलिए साल के इन 16 दिनों को केवल पितरों के लिए ही रखा गया हैं।
इस वर्ष पितृ पक्ष 10 सितंबर से प्रारंभ होकर 25 सितंबर तक रहेगा। आप पितृ पक्ष की पूजा , तर्पण विधि, दान आदि को सुबह सूर्योदय से लेकर दोपहर के 12 बजकर 24 मिनट तक पूर्ण कर ले।
गरुण पुराण के अनुसार जिन व्यक्तियों के माता पिता या कोई एक भी इस भू लोक को छोड़कर चले गए है उनके लिए आप तिल, फूल और जल की सहायता से अश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक आप उन्हे प्रसन्न कर उनके आशीर्वाद को प्राप्त कर सकते हैं।
सूर्योदय के समय प्रातः जल्दी उठकर घर को स्वच्छ कर ले सभी और गंगाजल का छिड़काव करे इसके बाद पूजन की तैयारी करे। पूजन में आप जल, तिल, फूल, धूप , दीप , नैवेद्य आदि का उपयोग करे।
अब आप सूर्योदय के समय बाए पैर को मोड़ते हुए घुटने को जमीन पर करे और दाएं पैर को जमीन पर टिकाए इस अवस्था में आप दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठें। अब फूल तिल, गंगा जल और गाय का कच्चा दूध से भरे एक बर्तन को ले, जल को हाथ में उठाए और अंगूठे के सहारे से फिर उसी बर्तन में जल गिराए ऐसा आपको 11 बार करना हैं।
इसके बाद आप घी गुड़ का दीपक जलाएं। अब आप प्रसाद बना ले और इसका तीन भाग करें। एक भाग कौवे के लिए निकाले, एक भाग गाय के लिए और तीसरे भाग को किसी बच्चे , गरीब या विधवा को दान करें। आपकी श्रद्धा हो तो आप ब्राह्मणों को भोज भी करवा सकते हैं। यह बहुत फलदायक होता हैं।
पितृ पक्ष में ऐसा माना जाता है हमारे अपने हमारे परिवार के लोग जो हमें छोड़ के दूसरे लोक में चले गए है वो हर वर्ष इन पद्रह दिनों के लिए यमलोक से भू लोक में आते है और अपने परिवार में जाते है।
गरुण पुराण के अनुसार ये सभी 15 तक परिवार के बीच ही रहते हैं इसलिए आपको पूरी शुद्धता बरतते हुए अपने पितरों के पसंद का भोजन बनाना चाहिए क्युकी इनके निराश या रूष्ट होने पर आपका आज, आपका आने वाला कल दोनों ही बर्बाद हो सकते हैं।