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हिंदू धर्म का इतिहास और इसके संप्रदाय

हिंदू धर्म का इतिहास बहुत पुराना है। या यूं कहे की हिंदू धर्म की नीव ब्रह्मा जी द्वारा रखी गई हैं और राम, कृष्ण, मनु और बुद्ध के द्वारा यह आज कलियुग तक चली आ रही। 

हिंदू धर्म ही सनातन धर्म के मूल में है जिसका वास्तविक अर्थ है शास्वत। जो कभी कभी खत्म न हों। 

वैदिक और हिंदू धर्म का मूल  

वैदिक या हिंदू धर्म को विभाजित नहीं करा जा सकता है या यूं कहे की यह दोनो ही एक हैं। वैदिक धर्म को ही सनातन धर्म कहा गया है और यही मूल है जो कृष्ण मनु के समय से आ रहा हैं। 

वैदिक धर्म ही मूल है और हिंदू धर्म एक पद्धति की तरह है। जिसे सभी मिल कर धीरे धीरे आगे ले आए। यह 90 हजार वर्ष पूर्व से मना गया हैं। 

इस काल में ही ऋषि मुनि हुए, देवी देवताओं ने धरती पर जन्म लिया। वेद , पुराण कथा, उपनिषद्  आदि की रचना हुई। इस पद्धति में संस्कृत भाषा का विशेष योगदान रहा। श्लोक, धर्म , वेद आदि की रचना संस्कृत भाषा में ही की गई हैं। 

हिंदू धर्म की शाखा

हिंदू धर्म को सबसे पुरातन काल से माना गया हैं। जिसे एशिया से लेकर हिमालय तक माना गया हैं। इस काल में दैविक और अदैविक अनेक अनुयायी हुए जिन्होंने धर्म को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया। 

हिंदू धर्म की अनुयाई भारत से लेकर नेपाल और मोरीसस तक फैले हुए हैं। हिंदू धर्म भारत में दूसरे स्थान पर है वही इस्लाम धर्म पहले स्थान पर हैं। 

हिंदू धर्म की 5 मुख्य समुदाय 

शैव 

वैष्णव 

शाक्त  

वैदिक 

संतमत  

शैव: 

शैव समुदाय के लोग शिव के उपासक थे। इस समुदाय के लोग वैदिक काल से चले आ रहे हैं। इसके अंदर महेश्वर, दसनामी, पशुपत , लिंगायत आदि समुदाय चले आ रहे हैं। 

वैष्णव 

इस समुदाय में वैरागी , दास, रामानंद, वल्लभ गौड़ आदि समुदाय थे। यह सभी विष्णु के उपासक थे।  

शाक्त 

इस समुदाय लोग देवी के उपासक हैं। इस समुदाय के ज्यादा लोग असम और पश्चिम बंगाल को ओर हैं। 

वैदिक में गणपत्य , कौमाराम, नाथ 

इनमे कुछ संप्रदाय के लोग कार्तिकेय की पूजा करते थे कुछ भगवान गणेश की। ग्रंथों और पुराणों पर आधारित धर्म को पूजने वाले स्मार्त भी इसी काल में थे। वेदों के अंग और उपांगो पर आधारित कई समुदाय बन गया जो शिव, भक्त और नारायण भक्त हुए। 

संतमत 

इस धर्म के अनुयाई में गोरखनाथ, जूना अखाड़ा, दादू पंथ, रैदास , निरंकार, निरंजनी पंथ आदि कई समुदाय के लोग हुए। इस धर्म के अनुयाई में भी कुछ शिव और कुछ वैष्णव भक्त हुए।

 

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