वयस्तता भरे जीवन में आजकल एक बीमारी काफी आम सी हो चली है जिसका नाम है थायरॉयड की समस्या। हर दस में से आठ महिलाओं हर बीमारी हैं। यह बीमारी शुरुआत में कन्ट्रोल न की गई तो यह आगे जाके विकराल रूप ले लेती हैं। थायराइड रोग की शुरुआत थायरॉइड ग्लैंड से होती है जिसका प्रभाव बाद में पूरे शरीर में देखने को मिलता हैं।
हमारे गले में श्वास नली होती हैं , नली के ठीक नीचे एक तितली के समान संरचना होती है जिसे थायराइड ग्लैंड या ग्रंथि कहते हैं। यह श्वास नली को फैलाने का काम करती हैं।
हमारे गले में स्थित यह ग्रंथि दो प्रकार के हार्मोन्स को बनाती है। जो है T3 और T4 यह विशेष हार्मोन्स होते है जो हमारी बॉडी में संतुलन स्थापित करते हैं। इनके असंतुलन से होती है यह समस्या।
थायरॉयड दो प्रकार का होता हैं
हाइपर थायरॉयड
हाइपो थायरॉयड
इस थायरॉयड में आपका वजन से तेजी से बढ़ने लग जाता हैं। थकान ,चिंता , अवसाद की स्थिति बन जाती हैं।
इस थायरॉयड में आपका वजन तेजी से घटता हैं। भूख न लगना, चक्कर आना जैसे लक्षण दिखते हैं।
थायरॉयड ग्रंथि या ग्लैंड हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती हैं। इसकी कमी हो जाने हमारे शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाती हैं। जिससे हमारे शरीर में अनेक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।
थायरॉयड के बीमारी में महिला का वजन तेजी से बढ़ता या घटता हैं।
भूख नही लगती हैं।
शरीर में हमेशा थकान महसूस होती हैं।
अनिद्रा, की समस्या बनी रहती हैं।
चिड़चिड़ापन, गुस्सा अधिक रहता है।
बाल झड़ना।
मूड का जल्दी जल्दी बदलना।
मांसपेशियों में दर्द और खिंचाव महसूस होना।
कोलेस्ट्रोल का बढ़ना।
मासिक धर्म का अधिक या कम आना।
लंबे समय से मानसिक स्थिति सही न होने पर या किसी बात को लेकर बहुत अधिक समय से तनाव में रहने पर थायरॉयड की समस्या होती हैं।
यदि आप लंबे समय से बीमार है या अधिक दवाइयों का प्रयोग करती हैं तो भी यह समस्या उत्पन्न हो जाती हैं क्युकी इसका सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है।
शरीर में हर तरह के विटामिन और पोषण की जरूरत होती है किसी की भी कमी से शरीर से समस्या हो जाती हैं ऐसे में विटामिन ए की कमी से वसा की मात्रा बढ़ जाती है साथ ही खून की कमी हो जाती है जिससे थायरॉयड की समस्या होती हैं।
महिलाओं में मासिक धर्म का समय से आना बेहद जरूरी हैं। ऐसे में किसी कमी से या खान पान के अव्यवस्थित होने से हार्मोंस डिस्टर्ब हो जाते हैं जैसे थायरॉयड की समस्या होती हैं।
महिलाओं में मां बनना स्वयं में एक जटिल समस्या है ऐसे में महिलाओं के शरीर की कई तरह के हार्मोंस बनते है जिनमे एक प्रमुख थायरॉयड भी है जो प्रिगेंसी के बाद या पहले जरूर डिस्टर्ब हो जाता हैं। इसलिए चिकित्सीय परीक्षण करते रहना चाहिए।
हमारा भोजन हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए होता हैं। ऐसे में अगर हम पैकेट का खाना, अधिक प्रिजर्वेशन का भोजन करना , प्लास्टिक में आए खाद्य पदार्थों का सेवन करना थायरॉयड का कारण होता हैं।
आजकल पुरुषों की भांति ही महिलाएं भी नशे में लिप्त रहती हैं। धूर्मपान, शराब, या अन्य नशे को लेना भी एक प्रमुख कारण हैं।
सबसे पहले आप अपनी जीवन शैली को सही करे। समय का ध्यान रखें अपने खाने पीने , सोने जागने का।
जितना हो सकते ताज़ा और घर का बना शुद्ध भोजन करे।
योग व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करे।
आयोडीन की कमी न होने दे।
तनाव से बचें।
व्यर्थ में अधिक दवाएं न खाएं।
सौंफ को पानी में डालकर खौला ले और इस पानी का सेवन करे।
धनिया के बीज का प्रयोग करे।
फल का अधिक प्रयोग करे।
विटामिन ए की कमी न होने दे।
हार्मोंस T3 और T4
विटामिन ए और आयोडीन नमक की कमी से।
यह दो प्रकार के होते हैं हाइपर थायरॉयड, हाइपो थायराइड
हाइपर थायरॉयड में वजन तेजी से बढ़ता हैं।
वजन तेजी से घटने लगता है।