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अशोकारिष्ट पीने के लाभ और उससे जुड़ी खास बातें

भारत देश को जड़ी बूटियों की खान माना गया हैं। यहां की भूमि पर अनेक शोध हुए है और कितनी ही बीमारियों का इलाज दवाइयों से ना करके जड़ी बूटियों द्वारा किया गया हैं। 

अशोकारिष्ट 

यह जड़ी बूटियों शरीर को स्वस्थ करती है। आपकी बिमारियो को दूर करती है और आगे बिमारी की आशंका कम से कम इसका भी भरपूर ख्याल रखती है। आज हम ऐसी ही एक जुड़ी बूटियों से बनी टॉनिक की बात करेंगे जिसका नाम है अशोकारिष्ट यह स्वाद और सेहत दोनों ही मामले में आपके लिए बेहद फायदेमंद हैं। 

अशोकारिष्ट पीने से लाभ: 

जैसा की आपको ज्ञात हैं, जड़ी बूटियों से शरीर को बहुत लाभ होता है। जिनमें से कुछ खास लाभ इस प्रकार हैं।

A. अशोकारिष्ट पीने से पेट से जुड़ी सभी पर बीमारियां दूर होती है। 

B. यह मांसपेशियों की ऐठन और सूजन पर भी कार्य करता हैं। 

C. पेट में होने वाले दर्द , कब्ज़ आदि को भी इस टॉनिक में माध्यम से दूर किया जा सकता हैं। 

D. अगर आपको भोजन को पचाने में कोई समस्या महसूस हो रही हैं तो इसे जरूर पिए। 

महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी :

अशोकारिष्ट महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी है। खासकर उन महिलाओं के लिए जिन्हें प्रजनन (प्रेग्नेंसी) संबंधी या महावारी (पीरियड) संबंधी गड़बड़ी हैं।

A. यदि गर्भ धारण करने में महिलाओं को समस्या हो रही है या बार बार गर्भ नष्ट हो जाता है तो ऐसे में यह राम बाण हैं। 

B. यह शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन व असंतुलन को सही करता हैं। 

C. यदि आपका मासिक चक्र गड़बड़ हो गया आप समय से पीरियड साइकिल करना चाहती है तो इसे अवश्य पिए। 

D. अशोकारिष्ट प्रकृति से जुड़ी वस्तुओं से बनाया गया है इसलिए यह शरीर पर कोई बुरा असर नहीं डालता हैं। 

पीने का सही तरीका : 

आपको इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिएं। एक बार सुबह नाश्ते के बाद दूसरी बार आपको इसका सेवन रात्रि में भोजन के बाद करना चाहिए। नाश्ते और भोजन के मध्य में कम से कम 15 मिनट का समय लेना चाहिए। 

अशोकारिष्ट से जुड़ी सावधानियां :

अशोकारिष्ट का वैसे तो सेवन करने में कोई समस्या नहीं हैं, लेकिन अगर आपको कोई गंभीर बीमारी है तो बिना डॉक्टर के परामर्श के सेवन न करे। 

आप अशोकारिष्ट के सेवन के साथ प्याज , लहसुन या खट्टी चीजें न खाएं इससे लाभ होने का संयोग कम हो जाता हैं। 

अशोकारिष्ट में मौजूद वस्तुएं :

अशोकारिष्ट में विशेष रूप से अशोक वृक्ष की छाल हैं। इसमें अन्य तौर पर ऐलोवेरा जेल, धातकी, अजाजी, मुस्तका, सुन्थी, दरवी और उत्पला सहित 16 जड़ी-बूटियाँ शामिल हैं साथ ही इसमें कुछ मात्रा में गुड़ और स्वनिर्मित शराब भी शामिल हैं।

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