राखी का पर्व भाई बहन के प्रेम और मजबूत बंधन का प्रतीक हैं।
राखी का पर्व सावन मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता हैं।
रक्षाबंधन का अर्थ उस रक्षा सूत्र से है जिसे बाध कर हम लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करते हैं।
रक्षाबंधन पर्व मुहूर्त देख कर मानना चाहिए, भद्रा नक्षत्र में राखी नही बांधनी चाहिए।
सबसे पहले राखी की शुरुआत पति पत्नी से हुई थीं। स्वर्ग की रानी शचि ने को थी अपने पति इंद्र देव की रक्षा के लिए मौली बाधी थी।
द्रोपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ बाधी थी भगवान कृष्ण को राखी।
युद्ध पर जाते हुए वीर जवानों को राखी बांधी जाती है उनके रक्षा व लौटने की कामना हेतु।
रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी बाधी थी।
मां लक्ष्मी ने राजा बली को राखी बाध नारायण भगवान की बैकुंठ में वापसी करवाई थी।
रक्षा बंधन मंत्र व अर्थ
येन बद्धो बलि राजा,दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:'
जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हें बांधता हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा।