सेरोगेसी मेडिकल साइंस की ऐसी देन है जिसके द्वारा वह स्त्रियां भी मां बन सकती जो शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हैं। 

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सेरोगेसी की प्रकया को दो विशेष भागो में बाटा गया है एक है 

ट्रेडिशनल सेरोगेसी 

और 

जेस्टेशनल सरोगेसी

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ट्रेडिशनल सेरोगेसी में पिता के स्पर्म के साथ सेरोगेट मदर के एग को मैच कराया जाता हैं। इसके पश्चात सेरोगेट मदर बच्चे को अपनी कोख में पालती हैं। इस प्रकार के पैदा हुए बच्चे की मां सेरोगेट मदर ही होती हैं।

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जेस्टेशनल सरोगेसी में कपल संतति के चाह में पिता का स्पर्म और माता का एग लेके मैच करवाया जाता है, इसके बाद सेरोगेट मदर के अंदर ट्रांसप्लांट किया जाता हैं। ऐसे में सेरोगेट मदर बच्चे की जैविक मां नहीं होती हैं।

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सेरोगेसी के द्वारा धन के व्यापार को रोकने के लिए सरकार ने 2019 में सरोगेसी बिल बनाया हैं। जिससे अनुसार धन के व्यापार को रोका जा सके।

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हाल ही में प्रीति जिंटा , शिल्पा शेट्टी और प्रियंका चोपड़ा ने भी सरोगेसी के जरिए मां बनने का सुख पाया हैं।

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सेरोगेट मदर किसी को बनाए जाने से पहले ध्यान देना रहता की महिला को कोई बीमारी ना हों, ब्लड प्रेशर न हो, थायराइड ना हो या वह किसी बीमारी से ग्रस्त न हों।

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