भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के दिन, घनघोर अधेरी रात्रि में भगवान कृष्ण ने माता देवकी और वासुदेव के पुत्र रूप में कारागार में जन्म लिया।
जन्म के तुरंत पश्चात ही वासुदेव ने कान्हा को कंस के प्रकोप से बचाने के लिए यशोदा नंदबाबा के घर गोकुल छोड़ आए।
भगवान कृष्ण ने बाल रूप में अनेक लीलाएं करी। माता यशोदा को अपने मुख में ही पूरे ब्रह्मांड के दर्शन कराए।
पूतना , कंस का वध कर बचपन से ही अपने वीरता और बल का परिचय दिया।
श्री कृष्ण को १६ कालाओं का ज्ञानी माना जाता है। जिनमे प्रमुख थी लीला, विद्या , धन , वैभव , यश, कांति , ज्ञान ,क्रिया , योग , सत्य , अनुग्रह आदी।
भगवान कृष्ण के विभिन्न नाम है:
गोपाल, कन्हैया, कान्हा , अचुत्य, केशव , दयालु, दयानिधि, देवाधिदेव, देवकीनंदन, देवेश, धर्माध्यक्ष, द्वारकाधीश, गोपाल, गोपालप्रिया, गोविंदा, ज्ञानेश्वर, हरि, हिरण्यगर्भा, ऋषिकेश, दीनदयालु आदि।
श्री कृष्ण ह्रदय से केवल राधा रानी के थे। लेकिन अपने भक्तों की कामना हेतु भगवान ने १६हजार ८ विवाह करे। जिनमे उनकी केवल 08 पत्नियां थीं. जिनके नाम रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा था.