नीम एक मात्र ऐसा पेड़ है जिसके वनस्पतिक, औषधीय, वैज्ञानिक आर्थिक और धार्मिक फायदे है। नीम हर रूप में असरकारक है, फिर चाहे इसकी जड़ हो, तना हो ,पत्तियां हो ,बीज हो या फिर छाल हो सभी में गुणवत्ता छुपी है।
नीम महोगनी फैमिली का सदस्य है। इसका वैज्ञानिक नाम Azadirachta Indica हैं।
नीम का यह प्रमुख गुण है की यह सूखे की स्थिति में भी लंबे समय तक हरा भरा रह सकता हैं।
नीम के द्वारा आप पेट की अशुद्धि , चर्म रोग , पेट दर्द , हैजा , डेंगू जैसी बड़ी बड़ी समस्याओं से भी छुटकारा पा सकते हैं।
नीम के नियमित प्रयोग से आप चेहरे के दाग धब्बों से , खुजली से और शरीर से जुड़ी सभी एलर्जी से मुक्ति पा सकते है।
नीम का तेल , नीम का काढ़ा या नीम की साफी इनको उपयोग में लाने से शरीर में होने वाले दर्द , तलवे में जलन , पेट की बीमारियो से भी निजात मिलता है।
नीम के पेड़ को मां शीतला का प्रतीक माना जाता है इसलिए चिकन पॉक्स जैसी घातक बीमारी में आप नीम के पेड़ में जल दे आपके सब रोग दूर होंगे।
नीम के पेड़ की उपासना करने से आकस्मिक निधन , दुर्घटना भी टल जाती है।
नीम को मंगलदेव का भी वास स्थान माना गया है , इनके पूजन से मंगल दोष दूर होता है साथ ही शनि देव के प्रकोप से भी बचा जा सकता है।
नीम का आर्थिक महत्व भी अब बहुत है विदेशों तक में नीम के गुणों के देखते हुए इनकी माग बढ़ी है और इनका निर्यात हो रहा है।