यदि आप महाकाल के भक्त है तो आपको रुद्राक्ष का महत्व अवश्य पता होगा। इसकी उत्पति महादेव के आसूओं से हुई है।
जो व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करता है उसमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं और वह व्यक्ति सभी प्रकार के भय पर विजय प्राप्त करता हैं।
रूद्राक्ष को पहनना मात्र ही हल नहीं हैं अपितु इसे धारण करने के साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी जरूरी हैं।
रूद्राक्ष माला बहुत ही पवित्र है इसको धारण करने से स्वयं को भी तन और मन से पवित्र बनाए।
रूद्राक्ष माला को जब प्रातःकाल धारण करे ,तब रूद्राक्ष मंत्र का जाप करें और मूल मंत्र का जाप 9बार करें।
रूद्राक्ष धारण करने के बाद आप यह ध्यान रखें की मास मदिरा का सेवन कदापि न करें।
जहा नवजात का जन्म होता है वहा रुद्राक्ष माला को कभी न ले जाए।
रूद्राक्ष माला को धारण कर कभी श्मशान घाट नहीं जाना चाहिए।
रूद्राक्ष माला को लाल धागा में धारण करना चाहिए, ध्यान रखे इसकी लंबाई हृदय तक होनी चाहिए। रूद्राक्ष का दाना आपके हृदय को छुए।
इसे सावन मास में या शिवरात्रि व्रत पर धारण करें। यदि अति आवश्यक हो तो सोमवार का दिन देख के ही धारण करें।
रात्रि को सोने से पहले भी रूद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को रुद्राक्ष का मूल मंत्र पढ़ना चाहिए।