भगवान गणेश माता पार्वती और महादेव शिव के पुत्र है। यह भगवान कार्तिकेय के भाई है। हाथी के मुख वाले भगवान गणेश जी पत्नी का नाम रिद्धि, सिद्धि हैं व इनके दो पुत्र शुभ और लाभ हैं।

www.pratibha.live | Image : Instagram

भगवान गणेश को बुद्धिजीवियों के भगवान माना गया हैं। किसी भी उद्यम की शुरुआत में , पूजन में, धर्म कार्य में भगवान गणेश की पूजन का प्रथम विधान है।

www.pratibha.live | Image : Instagram

भगवान गणेश जी का मंत्र: 

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। 
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ 

www.pratibha.live | Image : Instagram

महर्षि वेद व्यास जी ने महाभारत की रचना हेतु गणेश भगवान जी का मंत्र जप शुरू किया इसके पश्चात गणेश जी पधारे। यह दिन चतुर्थी का था। भगवान गणेश ने प्रकट होकर महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना मात्र दस दिन में कर दी। इन्ही दिनों को उत्सव के रूप में मनाते हैं जिसे गणेश चतुर्थी कहा जाता हैं।

www.pratibha.live | Image : Instagram

भगवान गणेश को सिंदूर अति प्रिय हैं इसलिए आप इन्हे बुधवार के दिन सिंदूर चढ़ाए। 

www.pratibha.live | Image : Instagram

भगवान गणेश का प्रिय भोग मोदक है। इसके बिना तो भगवान का भोग ही अधूरा हैं। 

www.pratibha.live | Image : Instagram

भगवान को लाल गुड़हल का फूल चढ़ाने से बुद्धि व बल की प्राप्ति होती हैं। 

www.pratibha.live | Image : Instagram

भगवान गणेश को दुर्बा चढ़ाने से उनकी असीम कृपा की प्राप्ति होती है। 

www.pratibha.live | Image : Instagram

भगवान गणेश को केले अति प्रिय है पर कभी अकेला केला नहीं चढ़ाएं जब भी भोग लगाएं दो केले एक साथ चढ़ाएं। 

www.pratibha.live | Image : Instagram

भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए आप हल्दी की गांठ , सुपारी, मौली या जनेऊ चढ़ाएं। 

www.pratibha.live | Image : Instagram

माता पिता की परिक्रमा करके भगवान गणेश जी ने सभी देवी देवताओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया जिस कारण हर कार्य के शुरू में भगवान गणेश की पूजा होती है।

www.pratibha.live | Image : Instagram

भगवान गणेश के 108 नाम है जिनमे प्रमुख नाम है:  एकदन्त, कपिल ,गजकर्ण, लम्बोदर, विकट ,विनायक ,गजानन, बुद्धिनाथ ,भालचंद्र, एकाक्षर ,गजकर्ण, आदि।

www.pratibha.live | Image : Instagram
Read More