भगवान गणेश माता पार्वती और महादेव शिव के पुत्र है। यह भगवान कार्तिकेय के भाई है। हाथी के मुख वाले भगवान गणेश जी पत्नी का नाम रिद्धि, सिद्धि हैं व इनके दो पुत्र शुभ और लाभ हैं।
भगवान गणेश को बुद्धिजीवियों के भगवान माना गया हैं। किसी भी उद्यम की शुरुआत में , पूजन में, धर्म कार्य में भगवान गणेश की पूजन का प्रथम विधान है।
भगवान गणेश जी का मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
महर्षि वेद व्यास जी ने महाभारत की रचना हेतु गणेश भगवान जी का मंत्र जप शुरू किया इसके पश्चात गणेश जी पधारे। यह दिन चतुर्थी का था। भगवान गणेश ने प्रकट होकर महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना मात्र दस दिन में कर दी। इन्ही दिनों को उत्सव के रूप में मनाते हैं जिसे गणेश चतुर्थी कहा जाता हैं।
भगवान गणेश को सिंदूर अति प्रिय हैं इसलिए आप इन्हे बुधवार के दिन सिंदूर चढ़ाए।
भगवान गणेश का प्रिय भोग मोदक है। इसके बिना तो भगवान का भोग ही अधूरा हैं।
भगवान को लाल गुड़हल का फूल चढ़ाने से बुद्धि व बल की प्राप्ति होती हैं।
भगवान गणेश को दुर्बा चढ़ाने से उनकी असीम कृपा की प्राप्ति होती है।
भगवान गणेश को केले अति प्रिय है पर कभी अकेला केला नहीं चढ़ाएं जब भी भोग लगाएं दो केले एक साथ चढ़ाएं।
भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए आप हल्दी की गांठ , सुपारी, मौली या जनेऊ चढ़ाएं।
माता पिता की परिक्रमा करके भगवान गणेश जी ने सभी देवी देवताओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया जिस कारण हर कार्य के शुरू में भगवान गणेश की पूजा होती है।
भगवान गणेश के 108 नाम है जिनमे प्रमुख नाम है: एकदन्त, कपिल ,गजकर्ण, लम्बोदर, विकट ,विनायक ,गजानन, बुद्धिनाथ ,भालचंद्र, एकाक्षर ,गजकर्ण, आदि।