1949 में घोषणा के बाद भी अंग्रेजी हुकूमत में हिंदी भाषा को वो दर्जा नहीं मिला जो मिलना चाहिए था। देश की आजादी के बाद 1947 के अंत से हिंदी भाषा को थोड़ा तवज्जो मिलना शुरू हुआ।
मैथिली शरण गुप्त, दिनकर, निराला, हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामचंद्र शुक्ल, जैसे कई महान हिंदी साहित्य के रचनाकार हुए जिन्होंने अपनी सृजनात्मक लेखन से हिंदी भाषा को नई दिशा दी।
26 जनवरी 1965 यह निर्णय लिया गया की अब से सभी सरकारी काम काम में अंग्रेजी के समान ही हिंदी भाषा का भी प्रयोग किया जाएगा।
भाषा धाराप्रवाह की भांति होती है। इसके गुण और स्वभाव को ही भाषा को प्रकृति कहते हैं। यह प्रकृति क्षेत्र, जगह , परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं।
आप अपने मन के भावों और विचारों को जिस माध्यम से प्रकट करते हैं उसे ही भाषा कहते हैं। भाषा सार्थक शब्दों का समूह होता हैं। जिसे पढ़कर, लिखकर , सुनाकर प्रकट किया जाता हैं।
हिंदी व्याकरण के अनुसार भाषा दो प्रकार की होती हैं।
लिखित भाषा
मौखिक भाषा
भाषा के अन्य भेद या प्रकार में इसे तीन भागों में बाटा गया हैं जो इस प्रकार हैं :
प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता हैं। इसकी घोषणा भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी द्वारा की गई थीं।
भाषा ही है जिसके द्वारा समस्त देश को एकजुट किया जाता हैं। भाषा के माध्यम से समस्त मन के भावों और विचारों को प्रकट करना संभव हो सका हैं।