बेशक लज्जा स्त्री का गहना कहा जाता हैं। इसी के साथ यदि मेल हो जाए गहनों या आभूषणों का तो स्त्रीयों की सुंदरता में चार चांद लग जाते हैं।
हमारे हिंदू धर्म में सुहागन स्त्रियों को विशेष रूप से सज धज कर रहने की बात कही गई हैं चूड़ी, बिंदी , नथ, बेदी, बिछिया , पायल और सिंदूर भरी मांग को सुहाग का प्रतीक माना जाता हैं।
सिंदूर को गहने में नहीं गिना जाता हैं लेकिन स्त्रियों की सज्जा में यह सबसे आता है सिंदूर से स्त्री का सुहाग बढ़ता है साथ ही स्त्री की सुंदरता भी बढ़ती हैं।
बिंदी भौंहों के बीच में लगाई जाती है। जहा ध्यान चक्र होता है, बार बार बिंदी से दबने से यह ध्यान चक्र हमेशा एक्टिव रहता हैं।
हाथों में चूड़ियां पहनने से रक्त संचार सही रहता हैं। यह श्वास रोग और हृदय रोग की संभावना को कम कर देता हैं।
मंगलसूत्र पहनने से जहा यह आपको बुरी नजर से बचाता हैं वही इसके उपयोग से ब्लड प्रेशर सही रहता हैं।
अंगूठी पहनने से पति पत्नी या प्रेमी प्रेमिका में प्यार बढ़ता हैं। इसलिए सगाई के समय अनामिका में सगाई की अंगूठी पहनाते हैं।
कमरबंद पहनने से स्त्री का कमर का हिस्सा स्वस्थ रहता है साथ ही मोटापा कम करता हैं।
कानों में झुमके डालने से श्रवण शक्ति अच्छी रहती हैं। साथ ही यह आपकी शरीर के तापमान को नियंत्रित करता हैं।
नथ पहनने से महिलाओं में पीरियड्स संबंधी सभी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही यह आपके नाक की शोभा बढ़ाता हैं।
हिंदू धर्म में बिछिया को स्त्री के सुहाग का प्रतीक माना जाता हैं इन्हे पैरो की अंगुलियों में पहना जाता हैं इससे यह एक इक्युप्रेसर पद्धति को बढ़ाता है जब महिलाऐं चलती है बिछिया से उंगली दबती है जिससे उनका तंत्रिका तंत्र और रक्त संचार सही रहता हैं।
ऐसा माना है की पायल की आवाज से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है ,खुशियां आती है। इससे अन्य फायदा यह भी है की यह Utrus अर्थात गर्भाशय को भी सुरक्षित रखता हैं। साथ ही यह हड्डियों को मजबूत बनाती हैं।