आज के समय में गलत खान पान और अव्यस्थित जीवन चर्या के कारण अनेक बीमारियों का खतरा मंडराने लगता है इसी क्रम में एक बीमारी है गठिया। जिसे अन्य भाषा में अर्थराइटिस और आर्थ्राल्जिया कहते हैं।
गठिया रोगी शरीर में कैल्शियम की कमी से होता है यह खासकर हड्डियों और ज्वाइंट्स में होने वाला रोग हैं। इसलिए अधिक से अधिक दही दूध खाएं। या इसका दूसरा कारण होता है यूरिक एसिड बढ़ जाना।
गठिया रोगी के वक्तियो के हाथ पैर में अकड़न , दर्द बहुत रहती है उनके लिए चलना फिरना बहुत मुश्किल होता हैं।
गठिया रोग खास कर हड्डियों या जॉइंट्स में होने वाला रोग है इसमें आपके शरीर के जॉइंट्स ब्लॉक हो जाते हैं।आपकी हड्डियों में भयंकर दर्द , खिंचाव और ,ऐठन महसूस होती हैं।
जितना हो सकते अच्छा खान पान रखे। नियमित एक्सरसाइज करे। खट्टा बिल्कुल न ले। गठिया रोग का एक प्रमुख कारण वात भी है इसलिए कोशिश करे की बादी चीज़ न खाए जो शरीर में वायु विकार करे। जैसे , अरबी, बैंगन, भिंडी, बंडा आदि।
सबसे पहले यह बात ध्यान रखे की बहुत अधिक खटाई का प्रयोग न करे।
गठिया के रोगी को यदि मेथी के दाने खिलाए जाए तो यह बहुत जल्दी असर करता हैं।
गठिया रोगी को यदि पानी में चाय की पत्ती खौला के बिना चीनी डाले पिया जाए तो यह बहुत कारगर साबित होता हैं।
गठिया रोगी को कैल्शियम आयरन अधिक लेना चाहिए।
दूध फ़ल, दही का अधिक प्रयोग करे जो शरीर की हड्डियों को मजबूत करें।
थोड़ी बहुत एक्सरसाइज अवश्य करे जिसे शरीर में ज्वाइंट ब्लॉक न हो। योगा ध्यान प्राणायाम भी बहुत फायदा पहुंचाता हैं ।
मन से पॉजिटिव रहे, किसी भी प्रकार की नेगेटिविटी दिमाग में न लाएं।
ऐसे में लौंग ,अलसी , भांग, सरसों के बनाए हुए तेल की मालिश से बहुत आराम होता हैं।
गठिया के रोगियों को सर्द गर्म मौसम से बचना चाहिए। जैसे एक दम से Ac से एक दम से गर्मी में न जाए।
गठिया रोगी को गुनगुने पानी से नहाना चाहिए।
ऐसे रोगियों को तनाव और चिंता से बचना चाहिए।
अगर आप इस बीमारी में आयुर्वेद का सहारा लेते है तो यह बहुत कारगर साबित होता हैं। क्युकी अंग्रेजी दवाओं के कारण शरीर में बहुत रिएक्शन होने की संभावना रहती हैं।साथ ही शरीर पर फोड़े और पेट में अल्सर तक की शिकायत उत्पन्न होती हैं।