मां दुर्गा के नव रूपों की पूजा का सबसे उत्तम समय होता है मां के नवरात्रे। इन दिनों में हम मां के हर रूप की पूजा अर्चना बेहद श्रद्धा भाव के साथ करते हैं।

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मां दुर्गा को शिव के साथ शक्ति रूप में जाना है, विवाह के बाद भोले का परिवार बढ़ा। दो पुत्र और 8 पुत्रियों के पिता बने भगवान शिव।

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आप ने मां पार्वती और शिव जी के 2 पुत्रों के विषय में सुन ही रखा होगा। भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय।

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पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान गणेश ने भगवान ब्रह्मा जी की मानस पुत्रियों रिद्धि सिद्धि से विवाह किया।

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वही भगवान कार्तिकेय ने इंद्र देव की पुत्रियों देवसेना और वल्ली से विवाह किया।

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पौराणिक कथाओं में कई स्थान पर गणेश जी की बहन का भी ज्रिक है जिनका नाम अशोकासुंदरी, ज्योति और मानस था। 

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अगर आप शिव पुराण पर दृष्टि डाले तो आपको भगवान शिव और मां पार्वती के अन्य पुत्र पुत्रियों का भी ज्ञान मिलेगा।

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पुराणों के आधार पर ऐसा लिखा है की भगवान शिव और मां पार्वती के 5 अन्य पुत्रियां थीं जिन्होंने नाग कन्याओं के रूप में जन्म लिया। 

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इनके  नाम जया, विषहर, शामिलबारी, देव और दोतलि हैं। यह 5 ही नाग रूप में है जो भी नाग पंचमी के दिन इनकी पूजा करता है भगवान शिव उन सभी पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं।  

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इसी प्रकार भगवान राम की बहन शांता और कृष्ण की बहन सुभद्रा का भी जिक्र भी शास्त्रों में मिलता हैं।

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भगवान शिव की भी बहन का जिक्र कथाओं में मिलता है, जिनका नाम आसावरी देवी था।

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